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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 6
मञ्जिष्ठया व्याघ्रनखेन शुक्त्या त्वचा सकुष्ठेन रसेन चूर्णः। तैलेन युक्तोऽर्कमयूखतप्तः करोति तच्चम्पकगन्धि तैलम् ॥
* मञ्जीठ, समुद्रफेन, शुक्ति, दालचीनी, कूठ, बोल-इन सबको बराबर लेकर चूर्ण करे। फिर उस चूर्ण को तिल के तेल में डालकर धूप में तपाये तो उस तेल में चप्पे के फूलों के तेल की गन्ध आ जाती है।
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