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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 5
त्वक्कुष्ठरेणुनलिकास्पृक्कार सतगरबालकैस्तुल्यैः । केसरपत्रविमिश्रर्नरपतियोग्यं शिरः स्नानम् ॥
दालचीनी, कूठ, रेणुका (गगनघूरि), नलिका, स्मृक्का, बोल, तगर, नेत्रबाला, नागकेसर, पत्र (गन्धपत्र) - इनको सम भाग लेकर पीसे और फिर शिर में लगाकर स्नान करे तो यह राजा के योग्य शिरः स्नान होता है।
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