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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 4
पश्चाच्छिरः स्नानसुगन्यतैलैलोंहाम्लगन्धं शिरसोऽपनीय । ** हृद्यैश्च गन्यैर्विविधैश्च धूपैरन्तः पुरे राज्यसुखं निषेवेत् ॥
केश काले हो जाने के बाद शिरः स्नान और सुगन्धित तेलों के द्वारा लोहे तथा सिकें के गन्धों को दूर करके मनोहर सुगन्धित द्रव्य और धूपों को लगाते हुये राजा को अन्तःपुर में राज्यसुख का सेवन करना चाहिये।
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