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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 37
पत्राधिकं निशि हितं सफलं दिवा च प्रोक्तान्यथाकरणमस्य कक्कोलपूगलवलीफलपारिजाते- विडम्बनैव । रामोदितं मदमुदा मुदिनं करोति ॥
रात में पान खाना हो तो पत्ता और दिन में खाना हो तो सुपारी अधिक डालकर खाना अच्छा होता है, इससे उलटा ( रात में सुपारी और दिन में पत्ता अधिक डालकर) खाने से केवल उपहास होता है। फक्कोल, सुपारी, लयलोफत (लवङ्गपुष्ण-लक्न में फूल नहीं होता; अतः फूल के स्थान पर फल का ग्रहण करना चाहिये) और जाती- फल से युत पान खाने से मनुष्य को मद के हर्ष से प्रसत्रता की प्राप्ति होती है।
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