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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 36
युक्तेन चूर्णेन करोति रागं रागक्षयं पूगफलातिरिक्तम् । चूर्णाधिकं वक्त्रविगन्यकारि पत्राधिकं साधु करोति गन्धम् ॥
ठीक-ठीक (न अधिक न कम) चूना से युक्त पान राग करता है, अधिक सुपारी- युत पान राग का नाश करता है, अधिक चूना से युत पान मुख को दुष्ट गन्धयुत करता है और पत्ते अधिक हों तो सुगन्धियुत करता है।
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