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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 35
कामं प्रदीपयति रूपमभिव्यनक्ति सौभाग्यमावहार वक्त्रसुगन्धितां च। ऊर्ज करोति कफजांश्च निहन्ति रोगां- स्ताम्बूलमेवमपरांच गुणान् करोति ॥
पान काम को प्रदीप्त करता है, शरीर की शोभा को बढ़ाता है, सौभाग्य करता है, मुख को सुगन्धियुत करता है, बल को बढ़ाता है, कफ से उत्पन्न रोगों का नाश करता है और अन्य गुण (कण्ठशुद्धि आदि) भी करता है।
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