इलायची, दालचीनी, गन्धपत्र, सौवीर, शहद, काली मिर्च, नागकेसर, कूठ इन सबको सम भाग लेकर गन्यजल बनाकर फिर उस गन्धजल में कुछ समय के लिये उन दन्तकाष्ठों को भोंगोये रक्खे।
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