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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 32
एलात्वक्पत्राञ्जनमधुमरिचैर्नागपुष्पकुष्ठैश्च गन्याम्भः कर्तव्यं कञ्चित् कालं स्थितान्यस्मिन् ॥
इलायची, दालचीनी, गन्धपत्र, सौवीर, शहद, काली मिर्च, नागकेसर, कूठ इन सबको सम भाग लेकर गन्यजल बनाकर फिर उस गन्धजल में कुछ समय के लिये उन दन्तकाष्ठों को भोंगोये रक्खे।
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