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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 31
सप्ताहं गोमूत्रे हरीतकीचूर्णसंयुते क्षिप्त्वा । गन्धोदके च भूयो विनिक्षिपेट् दन्तकाष्ठानि ॥
हरड के चूर्ण से युत गोमूत्र में साक्षिदिन तक दन्तकाष्ठों का भोंगो कर उनको उसमें से निकाल कर आगे कथित गन्धोदक में डाल दे।
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