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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 30
चन्दनतुरुष्कभागी शुक्त्यर्थं पादिका तु शतपुष्या। कटुहिङ्गुलगुडपूष्याः केसरगन्धाधतुरशीतिः ॥
बाहुनको केकच्छपुर से क्रम से टीन-तीन द्रव्य इकट्टा करके एक एका शुक्तिधा भाग और सौफ एक भाग का चतुरित और गुड का धूप देने पर चौरासी प्रकार के बकुलपुष्य के समान न्याय है।
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