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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 29
रोट्रोशीरनतागुरुमुस्तापत्रप्रियङ्गुवनपथ्याः 1 नवकोष्ठात् कच्छपुटाद् इव्यत्रितयं समुन्द्धत्य ॥
सोध्र, खस, तगर, अगुर, मुस्ता, गन्धपत्र, प्रिय, वर (परिपेलव), हरीतकी- इन नव द्रव्यों को लेकर पूर्वकथित रीति से
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