पूर्वकथित कच्छपुट में सर्जरस (राल) और श्रीवासक से युत जितने धूप कहे गये हैं, उनमें श्रीवास और सर्जरस न मिलाकर नेत्रबाला और दालचीनी मिला देने से
अनेक प्रकार के स्नान करने के लिये चूर्ण बन जायेंगे ।
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