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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 28
सर्जरसश्रीवासकसमन्विता येऽत्र सर्वधूपास्तैः । श्रीसर्जरसवियुक्तैः स्नानानि सवालकत्वग्भिः ॥
पूर्वकथित कच्छपुट में सर्जरस (राल) और श्रीवासक से युत जितने धूप कहे गये हैं, उनमें श्रीवास और सर्जरस न मिलाकर नेत्रबाला और दालचीनी मिला देने से अनेक प्रकार के स्नान करने के लिये चूर्ण बन जायेंगे ।
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