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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 26
नखतगरतुरुष्कयुता जातीकर्पूरमृगकृतोद्बोधाः । गुडनखधूप्या गन्याः कर्तव्याः सर्वतोभद्राः ॥
जायफल, कर्पूर और कस्तूरी सम भाग लेकर उद्बोधन करे तथा गुड़ और नख का धूप दे। इस तरह करने से सर्वतोभद्र नाम के अनेक प्रकार के गन्ध बन जायेंगे। इस चक्र में ऊर्ध्वाध, तिर्यक् या कोणाकृति क्रम से भागों को जोड़ने से सब जगह अट्ठारह भाग होते हैं। अतः इन गन्धद्रव्यों का नाम सर्वतोभद्र है।
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