इस सोलह कोष्ठ वाले कच्छपुट में जिन-जिन चार द्रव्यों के भागों का योग करने से अट्ठारह हो जायें, उतने प्रकार के गन्धयोग बनते हैं। इस तरह मिश्रित अट्ठारह भागों में नख, तगर और सिद्धक सम भाग लेकर मिलावे।
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