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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 23
द्वित्रीन्द्रियाष्ट भागैरगुरुः पत्र तुरुष्कशैलेयौ । विषयाष्टपक्षदहनाः प्रियङ्गुमुस्तारसाः केशः ॥
सोलह कोष्ठ का पूर्ववत् एक चक्र बाधुकर उसकी प्रथम पंक्ति में अगर दो भाग, गन्धपत्र तीन भाग, सिद्धक पाँच भाग और शैलेय आठ भाग रक्खे। द्वितीय पंक्ति में प्रियङ्गु पाँच भाग, मुस्ता आठ भाग, बोल दो भाग और शालोजातक (हीवेर) तीन भाग रक्खे।
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