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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 22
पूर्वेण पूर्वेण गतेन युक्तं स्थानं विनान्त्यं प्रवदन्ति सङ्ख्याम्। इच्छाविकल्पैः क्रमशोऽभिनीय नीते निवृत्तिः पुनरन्यनीतिः ॥
एक से लेकर जितने द्रव्य हों, उतनी संख्या तक नीचे से लेकर ऊपर को गई हुई पंक्ति में अंकों को लिखे और पूर्व-पूर्व गताङ्क में ऊपर के अङ्कों को जोड़ता जाय। यहाँ अन्तिम स्थान को छोड़कर संख्या होती है। अभीष्ट विकल्पों से चरलोष्टक को अन्यत्र ले जाकर उसको वहाँ छोड़कर फिर अन्य चरलोष्टक को अन्यत्र ले जाय।
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