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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 20
षोडशके द्रव्यगणे चतुर्विकल्पेन भिद्यमानानाम् । अष्टादश जायन्ते शतानि सहितानि विंशत्या ॥
अस्मिन् द्रव्यगणे षोडशके षोडशसहुये चतुर्विकल्पेन चतुर्भिश्चतुर्भिर्द्रव्यरेकैको गन्ध इत्यनेन क्रमेण भिद्यमानानामष्टादश शतानि विंशत्यधिकानि गन्धानां जायन्ते उत्पद्यन्ते। एतत्पुरस्तादाचार्य एवं प्रदर्शयिष्यति ।
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