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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 2
लौहे पात्रे तण्डुलान् कोद्रवाणां शुक्ले पक्वांल्लोहचूर्णेन साकम्। पिष्टान् सूक्ष्मं मूर्ध्नि शुक्लाप्लकेशे दत्वा तिष्ठेद् वेष्टयित्वार्द्रपत्रैः ॥
सिर्के में कोदो के चावल को रोहे के पात्र में पकाकर उसमें चूर्ण मिला कर खूब बारीक चूर्ण करने के पश्चात् उसको सिर्के से खट्टे किये केशों में लेप करके हरे पत्ते से ढ़क कर
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