द्रव्यचतुष्टययोगाद् गन्यचतुर्विशतिर्यथैकस्य । एवं शेषाणामपि षण्णवतिः सर्वपिण्डोऽत्र ॥
इस तरह एक द्रव्य के योग से छः भेद, चार द्रव्यों के योग से चौबीस भेद एवं शेष तोन स्थानों में स्थित चार-चार के बहत्तर भेद और सब मिलाकर छियानचे भेद होते हैं।
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