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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 17
अत्र सहस्त्रचतुष्टयमन्यानि च सप्ततिसहस्राणि । लक्षं शतानि सप्त विंशतियुक्तानि गन्धानाम् ॥
पूर्वोक्त सुगन्धित द्रव्यों के भेद से कुल मिलाकर १७४७२० प्रकार के सुगन्धित द्रव्य बनते हैं।
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