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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 15
अत्युल्बणगन्यत्वादेकांशो नित्यमेव धान्यानाम् । कर्पूरस्य तदूनो नैतौ द्वित्र्यादिभिर्देयौ ॥
धनियाँ और कर्पूर में अति उत्कट गन्ध होने के कारण सदा धनियाँ का एक भाग और कर्पूर के एक भाग से भी कम भाग डालना चाहिये। इन दोनों के दो-तीन आदि भाग कभी नहीं डालना चाहिये; क्योंकि इनमें अति उत्कट गन्ध होने के कारण ये अन्य द्रव्यों के गन्धों का नाश कर देते हैं।
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