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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 12
त्विगुशीरपत्रभागैः सूक्ष्मैलार्धेन संयुतैश्शूर्णः। पुटवासः प्रवरोऽयं मृगकर्पूरप्रबोधेन ॥
विना दालचीनी, खस, गन्धपत्र- इनके तीन भाग में सबका आधा ( डेढ़ ) भाग छोटी इलायची मिलाकर चूर्ण बनाये। कस्तूरी या कर्पूर से बोध करे तो वल सुगन्धित करने का उत्तम चूर्ण बनता है।
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