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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 11
भागैश्चतुर्भिः सितशैलमुस्ताः श्रीसर्जभागी नखगुग्गुलू च। कर्पूरबोधो मधुपिण्डितोऽयं कोपच्छदो नाम नरेन्द्रधूपः ॥
खाँड़, शैलेय और मोचा चार भाग; श्रीवास, सर्ज, नख और गूगल दो भाग- इन सबको पीस कर कर्पूर के चूर्ण से बोध (सुगन्धित) करे। बाद में उसमें शहद मिलाकर पिण्ड बना ले। यह कोपच्छद नामक राजाओं के योग्य धूप होता है। आई वस्तु में आर्द्र बस्तु को मिलाने का नाम बेध और चूर्ण में चूर्ण मिलाने का नाम बोध है।
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