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बृहत्संहिता • अध्याय 77 • श्लोक 10
हरीतकीशङ्खधनद्रवाम्बुभिर्गुडोत्पलैः शैलकमुस्तकान्वितैः । नवान्तपादादिविवर्धितैः क्रमाद् भवन्ति धूपा बहवो मनोहराः ॥
हरें, शंख, नख, बोल, नेत्रबाला, गुड, कूठ, शैलक, मोथा- इन नौ वस्तुओं को क्रम से एक पाद से लेकर नौ पाद तक ले। जैसे हरें एक पाद, शंख दो पाद, नख तीन पाद इत्यादि मोथा नौ, पाद = एक धूप। गुड, कूठ, शैलक, मोधा-इन चार वस्तुओं को क्रम से एक पाद से लेकर चार पाद तक ग्रहण करे तो दूसरा धूप। शैलक, मोथा- इन दो वस्तुओं को क्रम से एक पाद से लेकर दो पाद तक ले तो तीसरा पूप। हदें एक भाग में संख दो भाग मिलाने से चौथा धूप। उसमें नख तीन भाग मिलाने से पाँचवाँ धूप इत्यादि अनेक प्रकार के मनोहर धूप बनते हैं।
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