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बृहत्संहिता • अध्याय 76 • श्लोक 9
तिलाश्वगन्याकपिकच्च्युमूलैर्विदारिकाषष्टिकपिष्टयोगः आजेन पिष्टः पयसा घृतेन पक्वं भवेच्छष्फुलिकातिवृष्या ॥
तिल, असगन्ध, क्यांच (कवा) का जड़, विदारीकन्द- इन सबों को बराबर लेकर चूर्ण बनाकर सबके तुल्य साठी के चावलों का आटा उसमें मिलाने के पश्चात् उसको बकरी के दूध में मथकर बकरी के घृत में ही बनाई गई उसकी पूरी प्रचुर शुक्र उत्पत्र करने वाली होती है।
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