तिल, असगन्ध, क्यांच (कवा) का जड़, विदारीकन्द- इन सबों को बराबर लेकर चूर्ण बनाकर सबके तुल्य साठी के चावलों का आटा उसमें मिलाने के पश्चात् उसको बकरी के दूध में मथकर बकरी के घृत में ही बनाई गई उसकी पूरी प्रचुर शुक्र उत्पत्र करने वाली होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।