अन्यदप्याह- माषसूपसहितेन सर्पिषा पष्टिकौदनमदन्ति रे नराः । क्षीरमप्यनु पिवन्ति तासु ते शर्वरीषु मदनेन शेरते ॥
जिन रातों में घृत के साथ उड़द की दाल के साथ सट्टी के चावलों का भात खाकर जो ऊपर से दूध पीता है, यह उन रातों में कामदेव के साथ सोता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।