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बृहत्संहिता • अध्याय 76 • श्लोक 6
धात्रीफलानां सुभावितं स्वरसेन चूर्ण श्रौद्रसिताज्ययुक्तम् । कान्दर्पिकाध्यायः लीड्यानु पीत्वा च पयोऽग्निशक्त्या कार्म निकामं पुरुषो निषेवेत् ॥
आँवले के चूर्ण में आँवले के रस की चूर-बार भाषना देकर सुखाने के पश्चात् उसमें शहद या मिश्री मिलाकर चाटे और ऊपर से अपनी शक्ति के अनुसार दूध पीकर पुरुष पर्याप्त स्त्री-प्रसंग कर सकता है ।
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