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बृहत्संहिता • अध्याय 76 • श्लोक 3
पथ्याशिलाजतुघृतानि समानि योऽद्यात् । सैकानि विंशतिरहानि जरान्वितोऽपि सोऽ शीतिकोऽपि रमयत्यबलां युवेव ॥
सोना, मक्खी, शहद, पारा, लौहचूर्ण, हरें, शिलाजीत, घृत-इन सबको सम भाग लेकर चूर्ण करके शहद या घृत के साथ इक्कीस दिन तक खाने से अस्सो वर्ष का वृद्ध भी युवा की तरह त्त्रो में रमण करता है।
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