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बृहत्संहिता • अध्याय 76 • श्लोक 12
अत्यम्लतिक्तलवणानि यः क्षारशाकबहुलानि च दृक्शुक्रवीर्यरहितः स कटूनि वाऽत्ति भोजनानि । करोत्यनेकान् व्याजान् जरत्रिव युवाऽप्यबलामवाप्य ॥
अधिक खट्टा, अधिक तीता, अधिक नमकीन, अधिक कटुआ ( लाल मिर्च आदि), अधिक खारा या अधिक शाक भोजन करने वाला युवा पुरुष भी दृष्टि, वीर्य और बल से रहित होकर वृद्ध की तरह लो-प्रसंग के समय अनेक व्याज करता है।
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