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बृहत्संहिता • अध्याय 76 • श्लोक 11
साजमोदलवणा हरीतकी शृङ्गवेरसहिता च पिप्पली। मद्यतक्रतरलोष्णवारिभिधूर्णपानमुदराग्निदीपनम् ॥
अजवायन, नमक, हरें, सोंठ, पीपत-इन सबको सम भाग लेकर चूर्ण बनाने के पश्चात् उस चूर्ण को मद्य, तक, काठी या उष्ण जल के साथ सेवन करने से जठराग्नि दीपित होती है।
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