क्षीरेण वा गोक्षुरकोपयोगं विदारिकाकन्दकभक्षणं वा। कुर्वन्न सीदेद् यदि जीर्यतेऽस्य मन्दाग्निता चेदिदमत्र चूर्णम् ॥
गोक्षुरक (गोखरू) का चूर्ण या विदारीकन्द का चूर्ण खाकर ऊपर से दूध पान करने पर यदि यह चूर्ण पत्र जाय तो पुरुष ली-प्रसङ्ग से शीण नहीं होता है। यदि मन्दाग्नि के कारण नहीं पच सके तो पहले अग्निसन्दीपन के लिये वक्ष्यमान चूर्ण का सेवन करना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।