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बृहत्संहिता • अध्याय 76 • श्लोक 10
क्षीरेण वा गोक्षुरकोपयोगं विदारिकाकन्दकभक्षणं वा। कुर्वन्न सीदेद् यदि जीर्यतेऽस्य मन्दाग्निता चेदिदमत्र चूर्णम् ॥
गोक्षुरक (गोखरू) का चूर्ण या विदारीकन्द का चूर्ण खाकर ऊपर से दूध पान करने पर यदि यह चूर्ण पत्र जाय तो पुरुष ली-प्रसङ्ग से शीण नहीं होता है। यदि मन्दाग्नि के कारण नहीं पच सके तो पहले अग्निसन्दीपन के लिये वक्ष्यमान चूर्ण का सेवन करना चाहिये ।
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