मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 75 • श्लोक 9
सर्वोपकारानुगतस्य लोकः सर्वोपकारानुगतो नरस्य । कृत्वोपकारं द्विषतां विपत्सु या कीर्तिरल्पेन न सा शुभेन ॥
जो मनुष्य सबका उपकार करने में उद्यत होता है, उसका उपकार सभी मनुष्य करते हैं। विपत्ति में शत्रुओं का उपकार करने से जो कीर्ति मिलती है, वह अल्प पुण्य का फल नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें