मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 75 • श्लोक 4
आत्मायमात्मनि गतो ग्राह्योऽ चलेन मनसा हृदयेऽतिसूक्ष्‌मो सतताभियोगात् । यो यं विचिन्तयति याति स तन्मयत्वं यस्मादतः सुभगमेव गता युवत्यः ॥
परमात्मा के हृदय में यह अतिसूक्ष्म जीवात्मा स्थित है। स्थिर चित्त से और निरन्तर अभ्यास सेः उसका साक्षात्कार कराए चाहिये; क्योंकि जो। जिसका निरन्तर चिन्तन करता है, वह तन्मय हो जाता है। इसलिये तो भी निरन्तर स्मरण करने से सुभग पुरुष को प्राप्त करती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें