मन के साथ आत्मा, इन्द्रिय के साथ मन और अपने विषय के साथ इन्द्रिय गमन करता है। यह आत्मा के जाने का शोघ्र क्रम और योग (सम्बन्ध) है। मन के लिये कोई स्थान अगम्य नहीं है तथा जहाँ मन जाता है, वहाँ आत्मा भी जाती है।
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