मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 75 • श्लोक 2
भड्ङ्क्त्वा काण्डं पादपस्योप्तमुर्व्या बीजं वास्यां नान्यतामेति यद्वत् । एवं ह्यात्मा जायते स्त्रीषु भूयः कश्चित्तस्मिन् क्षेत्रयोगाद्विशेषः ॥
जिस वृक्ष का कलम या बोज भूमि में बोया जाता है, वही वृक्ष उत्पन होता है. दूसरा नहीं। इसी तरह आधारभूत ही में फिर पुत्ररूप से आत्मा की ही उत्पति होती है। केवल क्षेत्र के योग से कुछ विशेष होता है। जिस प्रकार क्षेत्र के भेद से वृक्षों में भी साधारण भेद होता है, उसी तरह त्रियों में भी जानना चाहिये ।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें