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बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 6
प्रबूत सत्यं कतरोऽङ्गनानां दोषोऽस्ति यो नाचरितो मनुष्यैः । धाष्टचैन पुम्भिः प्रमदा निरस्ता गुणाधिकास्ता मनुनात्र चोक्तम् ॥
खियों में ऐसा कौन दोष है, जिसको पुरुषों ने पहले नहीं किया अर्थात् पहले पुरुषों ने सभी दोष किये, तत्पश्चात् उन्हीं से खियों ने सीखे। पुरुषों ने अपनी धृष्टता से खियों को जीत लिया; क्योंकि पुरुषों से खियों में अधिक गुण होते हैं। ऐसा ही मनु द्वारा भी कहा गया है।
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