सुख, भय, हर्ष आदि आकार को छिपाते हुये, शत्रु की सेना को जीतने के लिये
प्रयत्न करते हुये, किये न किये सैकड़ों व्यापारों की शाखाओं से व्याकुल तन्त्रों को विचार करते हुये, मन्त्रियों द्वारा कथित नीति का सेवन करते हुये, पुत्र आदि से भी शङ्कित रहते हुये, दुःखार्णव में निमग्न राजाओं के लिये स्त्री का आलिङ्गन मात्र थोड़ा- सा ही सुख होता है।
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