ब्रह्मा से लेकर कोट पर्य्यन्त सारा संसार स्त्री-पुरुष के सम्बन्ध से बंधा हुआ है। अतः इसमें क्या लज्जा? जहाँ महादेव जी भी युवती ( तिलोत्तमा) को देखने के लोभ से चतुर्मुखता को प्राप्त हुये ।
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