कामिनीं प्रथमयौवनान्वितां मन्दवल्गुमृदुपीडितस्वनाम् । उत्स्तनीं समवलम्ब्य या रतिः सा न धातृभवनेऽस्ति मे मतिः ॥
मन्द, सुन्दर, कोमल और पीड़ित शब्द करती हुई, ऊँचे स्तनों से युत नवयौवना स्त्री को आलिङ्गन करने से जो सुख प्राप्त होता है, वह ब्रह्मलोक में भी प्राप्त नहीं होता-ऐसा मेरा मत है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।