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बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 18
कामिनीं प्रथमयौवनान्वितां मन्दवल्गुमृदुपीडितस्वनाम् । उत्स्तनीं समवलम्ब्य या रतिः सा न धातृभवनेऽस्ति मे मतिः ॥
मन्द, सुन्दर, कोमल और पीड़ित शब्द करती हुई, ऊँचे स्तनों से युत नवयौवना स्त्री को आलिङ्गन करने से जो सुख प्राप्त होता है, वह ब्रह्मलोक में भी प्राप्त नहीं होता-ऐसा मेरा मत है।
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