मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 17
स्त्रीरत्नभोगोऽस्ति नरस्य यस्य निःस्वोऽपि साम्प्रत्यवनीश्वरोऽसौ राज्यस्य सारोऽशनमाङ्गनाध तृष्णानलोद्दीपनदारु शेषम् ॥
जिस पुरुष को उत्तम ली का सम्भोग प्राप्त हो, वह दरिद्र होने पर भी राजा के समान है। क्योंकि राज्य का सार भोजन और खी- ये दो ही वस्तु होते हैं। शेष धन आदि तो तृष्णारूप अग्नि को प्रज्वलित करने वाले काष्ठमात्र ही होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें