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बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 16
पुरुषश्चदुलानि कामिनीनां कुरुते यानि रहो न तानि पश्चात् । सुकृतज्ञतयाऽङ्गना गतासूनवगृह्य प्रविशन्ति सप्तजिह्नम् ॥
कामातुर मनुष्य एकान्त में खियों को जिस प्रकार मधुर वचन कहते हैं, उस प्रकार बाद में नहीं कहते; किन्तु स्त्री मृत पति का भी आलिङ्गन करते हुये अग्नि में प्रवेश कर जाती है।
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