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बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 15
अहो धाष्टर्श्वमसाधूनां निन्दतामनघाः स्त्रियः । मुष्णतामिव चौराणां तिष्ठ चौरेति जल्पताम् ॥
पवित्र लियों की निन्दा करते हुये दुर्जनों की पृष्टता, चोरी करते हुये चोर का 'चोर ठहर' ऐसा कहने की तरह ही है।
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