जो पुरुष अपनी स्त्री को छोड़कर परखी-गमन करता है, वह बाहर की तरफ किये हुये रोम वाले गदहे के चमड़े से अपने शरीर को इक कर छः मास तक 'भिक्षां देहि यह कहकर भीख माँगने से शुद्ध होता है।
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