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बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 11
जाया वा स्याज्जनित्री वा सम्भवः स्त्रीकृतो नृणाम् । हे कृतघ्नास्तयोर्निन्दां कुर्वतां वः कुतः शुभम् ॥
मनुष्यों की उत्पत्ति श्री से ही होती है अर्थात् माता से साक्षात् और भार्या से पुत्ररूप धारण करके मनुष्य की उत्पत्ति होती है। इसलिये जाया हो या जनित्री (माता) हो, हे कृतज्ञ। उन दोनों (जाया और जनित्री) को निन्दा करने से तुम्हारा मंगल कहाँ से हो सकता है?।
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