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बृहत्संहिता • अध्याय 74 • श्लोक 10
जामयो यानि गेहानि शपन्त्यप्रतिपूजिताः । तानि कृत्याहतानीव विनश्यन्ति समन्ततः ॥
असम्मानित कुलखियाँ जिन गृहों को शाप देती हैं, कृत्या से हत की तरह चारो तरफ से वे गृह नष्ट हो जाते हैं।
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