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बृहत्संहिता • अध्याय 73 • श्लोक 6
अन्येषां तु नराणां शीतातपवारणं तु चतुरस्रम् । समवृत्तदण्डयुक्तं छत्रं कार्य तु विप्राणाम् ॥
अन्य पुरुषों के लिये शीत और धूप की निवृत्ति करने वाला चतुर्भुजाकार छत्र तथा ब्राह्मण के लिये गोल दण्डयुक्त छत्र बनाना चाहिये।
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