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बृहत्संहिता • अध्याय 73 • श्लोक 5
अन्येषामुष्णघ्नं प्रसादपद्वैर्विभूषितशिरस्कम् । व्यालम्बिरत्नमालं छत्रं कार्य तु मायूरम् ॥
युवराज को छोड़कर शेष राजपुत्रों के लिये मयूरपक्षों का बना हुआ, प्रसादपट्टों से शोभित शिर वाला और लटकती हुई रत्नमालाओं से युक्त छत्र धूपनिवृत्ति के लिये बनाना चाहिये।
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