स्नेहो मृदुत्वं बहुवालता वा वैशद्यमल्पास्थिनिबन्धनत्वम् ।
शौक्ल्यं च तासां गुणसम्पदुक्ता विद्धाल्पलुप्तानि न शोभनानि ॥
स्निग्ध, कोमल, अधिक निर्मल, परस्पर विना मिले, छोटी, मध्य की हड्डी वाले, सफेद-ये सब बालों के गुणों की सम्पत्तियाँ हैं अर्थात् ऐसे बाल शुभ होते हैं तथा टूटे, फटे, छोटे और उखड़े बाल शुभ नहीं होते हैं।
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