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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 9
वस्त्रस्य कोणेषु वसन्ति देवा नराश्च पाशान्तदशान्तमध्ये । शेषास्त्रयश्चात्र निशाचरांशास्तथैव शय्यासनपादुकासु ॥
नवधा विभक्त वत्र के चारो कोनों में देवता, पाशान्त मध्य (वत्र के मूल) और दशान्त मध्य (यत्त्र के अग्र) में मनुष्य तथा मध्यस्थित तीन भागों में राक्षस की कल्पना करनी चाहिये। इसी प्रकार शय्या, आसन और पादुका में भी विचार करना चाहिये।
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