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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 7
भद्रपदासु भयं सलिलोत्यं तत्परता भवेत् सुतलब्धिः । रत्नयुतिं कथयन्ति च पौष्यो योऽभिनवाम्बरमिच्छति भोक्तुम् ॥
उत्तरभाद्रपद में पुत्र का लाभ और रेवती नक्षत्र में नवीन व धरण करे तो रानलाभ होता है।
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