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बृहत्संहिता • अध्याय 71 • श्लोक 6
मिष्टमन्त्रमपि वैद्यदैवते वैष्णवे भवति नेत्ररोगता । धान्यलब्धिरपि वासवे विदुर्वारुणे विषकृतं महद्भयम् ॥
अव में नेत्ररोग, धनिष्ठा में का लाभ, शतभिषा में विष का अधिक भय, पूर्व भाद्रपद में जल का भय
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